Sunday, July 11, 2010

बारिश कि बूंदें.......

बारिश कि बूंदों ने फिर, अपना करतब दिखलाया.
धरती के सीने पर, प्यार का बादल बरसाया.
मिटटी कि सोंधी खुशबू ने, घर आंगन सब महकाया.
पुरवा हवा के झोकों से, फिर मेरा मन भी ललचाया.

झम-झम के पानी फिर बरसा, हरियाली खेतो में छाई.
हर किसान के चेहरे पे, उम्मीद कि किरने लहराई.
बागों में चिड़िया चहकें, और इक संगीत बजाये.
कल कल करती नदियाँ भी, ताल से ताल मिलाएं.
टिप-टिप बूंदों के स्वर ने, इक नव संगीत बनाया
...........बारिश कि बूंदों ने...!

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