Monday, September 5, 2011

"Tere" Liye

रातों के अंधेरों में, इन उजले सबेरों में,
घनघोर घटाओं में, मदमस्त हवाओं में.
पानी की कल-कल में, चिड़ियों के कलरव में,
संगीत नया है बसा हुआ, इस पूरे मौसम में..!

वो याद पुरानी थी, ये इक नयी कहानी है,
वो बीता बचपन था, ये इक नयी जवानी है.
तब अपने भी दुश्मन थे, अब गैर भी अपने हैं,
कुछ ऐसा मौसम है, कुछ ऐसी रवानी है..!

हर सांस में खुशबू है, मेरी धड़कन बदली है,
एक मस्त परिंदे सी, मेरी चाल भी बहकी है.
ये "तेरा" जादू है, या कोई सुन्दर सपना है,
इन मस्त निगाहों में, अब तो घर अपना है.

अपना ले मुझे, या ठोकर दे, ये "तेरी" मर्ज़ी है,
दीवाना या पागल कह दे मुझे, बस इतनी अर्जी है.

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