Saturday, December 29, 2012

Stop This Shame - Stop Discrimination Against Women

आज मैंने सुबह उठ कर ये समाचार सुना की, दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार महिला की मृत्यु हो गयी है। मेरे पास शब्द नहीं है इस परिस्थिति का वर्णन करने के लिए, पर मैं अपनी भावनाओं को अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहता हूँ:

भावनाएं बिखरी हुयी है आज मेरे मन के अन्दर
रूह तक काँप गयी है मेरी, देख कर ये मंजर।

क्या ऐसे हालत के लिए दोषी नहीं हैं हम,
लड़कियां 'दूसरे दर्जे' की नागरिक हैं, ऐसा क्यूँ है वहम।

केवल सरकार ही जिम्मेदार नहीं है इस परिस्थिति के लिए,
सामाजिक सोच और हमारे विचार ही कारण है इसके लिए।

सडको पर देखा मैंने लोगों को अपना गुस्सा जताते,
बात कर रहें है लोग हर जगह, आते और जाते।

आवश्यक है इस उर्जा को संचालित करने का,
इस देश के लिए सही सरकार और सही समाज देने का।

प्रण लेना होगा की, सही मतदान करेंगे हम,
एक नयी सरकार और एक नयी सोच चुनेंगे हम।

महिलाओं को उनका मौलिक अधिकार दिलाना होगा,
एक सुरक्षित भारत बनाने के लिए, सामाजिक परिवर्तन लाना होगा।

Friday, February 10, 2012

Purani Yaaden

पुरानी यादें भी कभी ताजा कर लो,
पूरे किस्से नहीं तो, आज आधा कह लो,
ज़िन्दगी की आपाधापी में सब भूल बैठे हो,
आज के गम के बदले, कुछ पुरानी खुशियाँ चुन लो.

कल मोड़ पर मिली थी, ज़िन्दगी!
कुछ खामोश, कुछ बदहवास, कुछ बदगुमान,
उसको भी कुछ पल हसीन दे दो,
पुरानी यादें भी कभी ताजा कर लो.

मशीनी हालात में जी रहे हो आज कल,
ऐसा लगता है, दिल में जज्बात गुम गए हैं कहीं,
आज फिर से कुछ पुराने, अपने सपने बुन लो,
पुरानी यादें भी कभी ताजा कर लो.


Saturday, February 4, 2012

Badi Muddat Ke Baad Aaya Hoon

बड़े अरसे से आरज़ू थी, कि तेरा दीदार करें,
तू वक़्त दे या ना दे मुझे, पर तुझे प्यार करें.
बड़ी मुद्दत के बाद आया हूँ तेरे दर पर,
अब तेरी मर्ज़ी चाहे इकरार करे या इंकार करे.

मैंने छोड़ा था तेरा दर, वो दिन याद है मुझे,
सवाले इश्क से मुकरा था, वो दिन याद है मुझे,
आज खुद ही आया हूँ तेरी महफ़िल में,
कभी ठुकराया था तेरा नजराना, वो दिन याद है मुझे.

देख ली दुनिया सारी मैंने! तेरे बिन,
कुछ भी नहीं इस ज़माने में.
लौट के आया हूँ तेरी बज़्म में मैं,
बड़ा जज्बा है तेरे प्यार के फ़साने में.

इल्तिजा तू सुन ले तेरे एक दीवाने की,
फिर चाहे तो मुझे याद करे या ना करे.