Tuesday, November 26, 2013

आज कल खुशियाँ मेरा पता पूछ रही हैं

आज कल खुशियाँ मेरा पता पूछ रही हैं।
मुझे शक़ है कि कोई तूफ़ान आने वाला है।
कल तो हद ही हो गयी!! दर्द भी नहीं हुआ!!
अब तो यक़ीं हो गया, कि दिल बैठने वाला है।

अरे उसने तो मुझे अमीर समझ लिया यारों,
अब तो पक्का है, कि मेरा मजाक होने वाला है।
मांग कर लाया था चंद खुशियां उधार कि,
इन गफलतों में तो, हर एक गम भी लुटने वाला है।

मै वो नहीं, जो तुम समझ बैठो हो,
मै वो हूँ, जो खुद को ही ना समझ पाया है।
वक़्त के थपेड़ों ने कुछ ऐसी चोट दी,
कि हर एक अच्छी बात में, चोर नजर आया है।

मेरी रूह भी मुझसे मिलने कि नाकाम कोशिश में है,
और इस अफरा तफरी में, मेरा वज़ूद भी खोने वाला है।
आकर कोई तो सम्भाल ले मुझको !!
वर्ना मेरे दिल और दिमाग का हर तार बिखरने वाला है।



Sunday, November 24, 2013

My Childhood - मेरा बचपन

खुशबू की तरह महका हूँ, चिड़ियों की तरह चहका हूँ। हवाओं की तरह बहका हूँ, वो मेरा बचपन ही कुछ ऐसा ही था अब तो इस शहर में साँसों के लिए भी तरसा हूँ

सरपत के झुंडो में,
खेतो में बागीचों में।
नदियों में तालाबों में,

खेला हूँ, कूदा हूँ और खूब दौड़ा हूँ।
पर अब तो इस शहर में एक बारामदे के लिए तरसा हूँ।

कच्चे पक्के रास्तों पर,
पगडंडियों पर चौरास्ते पर।
घर के पीछे वाले मैदानो पर,

साइकिल के साथ खूब भागा हूँ और गिरा हूँ,
पर अब तो इस शहर में एक खाली सड़क के लिए तरसा हूँ।

Friday, November 22, 2013

Aaj aur kal ke neta ji - आज और कल के नेता जी,

आज twitter पर, एक बंधू से चर्चा हो रही थी, चर्चा के ही दौरान "नेता जी" का जिक्र हो आया। हम दोनों इस बात से सहमत थे कि इस देश में तो एक ही नेता जी थे पर आज कल बहरूपियों का ज़माना है।  प्रस्तुत हैं मेरे विचार:

वो बोलते थे खून दो आज़ादी दूंगा
ये बोलते हैं खून पियूँगा और कुछ नहीं दूंगा।

वो बोलते थे मै तुम्हारे साथ लड़ूंगा
ये बोलते है तुम मेरे लिए लड़ो और मरो।

वो दान मांगते थे देश के लिए
ये देश लूटते हैं, अपने लिए।

उन्होंने जान गंवाई, कुछ सिला भी नहीं मिला
इन्होने जीने भी नहीं दिया और सब कुछ छीन लिया।

उन्होंने ने अंग्रेज़ों के छक्के छुड़ाए
ये हमारे छक्के छुड़ा रहे हैं।

काश वो नेता जी कुछ और दिन साथ होते
इन धूर्त नेतोओं के चंगुल से हम कहीं दूर होते।

अब तो यही आस है कि 'वो' नेता जी फिर से आये,
'खून' भले ही ले ले हमारा, पर हमे 'आज़ादी' दिलाएं।

Monday, November 18, 2013

Asar Lucknavi - kuchh Shair

वह काम कर बुलन्द हो जिससे मजाके-जीस्त,
दिन जिन्दगी के गिनते नही माहो-साल में।  


किसी के काम न जो आए वह आदमी क्या है,
जो अपनी ही फिक्र में गुजरे, वह जिन्दगी क्या है? 


शिकवा किया था अज़ रहे-उल्फ़त, तंज़ समझकर रूठे हो
हम भी नादिम अपनी ख़ता पर, आओ, तुम भी जाने दो। 

ख्वाब बुनिए, खूब बुनिए, मगर इतना सोचिए,
इसमें है ताना ही ताना, या कहीं बाना भी है। 


उनके आने की बंधी थी आस जब तक हमनशीं,
सुबह हो जाती थी अक्सर जानिबे - दर देखते। 


किससे कहिए और क्या कहिए, सुनने वाला कोई नहीं,
कुछ घुट-घुट कर देख लिया, अब शोर मचाकर देखेंगे। 





Monday, November 11, 2013

Khushq Aankhein aur Mera Desh

अश्क़ सूख गए कुछ इस तरह,
सोचते-सोचते हो गयी सहर।
ख़ुश्क़ आँखों ने फिर पूछा मुझे,
दिन गुज़ारना है अब किस तरह।

हर रोज़ कुछ हाल ऐसा ही है,
मन में सवाल कुछ ऐसा ही है।
ये इश्क़ और मुहब्बत नहीं हैं यारों,
मेरे बेहाल देश का ख्याल ऐसा ही है।

आज कल सूरज कुछ ऐसे निकलता है,
कि इसकी रौशनी में भी धुंधला सा दिखता है।
ठंढ तो अब भी है हवा में पुरानी जैसी ही,
पर सियासती गर्मी का असर दिखता है।

क्या यही देश कि प्रगति कि निशानी है?
क्या यही हमारे उदय कि कहानी है?
क्या ऐसे ही उत्थान करेंगे हम?
क्या यही हम सब ने मिलकर ठानी है?

गर नहीं, तो ये समय है जागने का,
देखने का, सोचने का, और कुछ कर गुज़रने का।
आपस के मतभेदों से ऊपर उठने का,
और एक खूबसूरत भारत देश बनाने का।

Wednesday, November 6, 2013

Meri Diwali - Kal aur Aaj

इस बार दीवाली कि धूम ही कुछ और थी
तेल के दिए कम और बिजली कि लड़ियों कि दौड़ थी।
पर फिर भी इसमें कुछ पुरानी यादें ताजा थीं,
धान कि रंगोली, तेल के दिए और माँ कि पूजा शामिल थी।

पर और भी कुछ बदल गया है कल और आज में,
दीवाली के त्यौहार में, इसके मानाने के अंदाज़ में।
पांव तो आज भी छूते हैं, बच्चे मेरे गांव में,
पर Happy Diwali गूंजता है इन सारे 'प्रणाम' में।

कुछ साल पहले 'दिये' कुम्हार दे जाता था,
बदले में उसके खेत से अनाज ले जाता था।
आज कल बाज़ार में खरीदने पर भी नहीं मिलते ये,
एक ज़माने में मेरा छोटा भाई, पुराने दीयों से  तराज़ू बनता था।

अब कोई घर को गोबर से लीपता नहीं है
ना ही बाहर कि दीवालों पर चूना लगता है।
पक्के घरों कि बात ही कुछ और है,
क्यूंकि वहाँ ८-१० साल में ही कभी, paint लग पाता है।

सब कुछ शायद और भी तेजी से बदलता जाएगा,
बिजली कि लड़ियों और मोमबत्तियों से दीवाली मन जाएगा।
बस इतनी सी गुज़ारिश है कि दिल से उल्लास कम ना हो,
मिट्टी दीये भले ना हो, पर प्यार कि रौशनी हर और हो।