Saturday, December 14, 2013

मै और मेरा इलाहाबाद :)

इलाहाबाद....!! कहाँ से शुरू करूँ..… एक ऐसा शहर जो कि मेरे घर से बाहर मेरा पहला बसेरा बना। मुझे बहुत अच्छे से याद है, जुलाई महीने कि वो बादलों से भरी रात, जब अनाज के बोरे और एक बैग लेकर मै अपने बड़े भाई के एक मित्र के साथ, UP Roadway कि बस में इलाहाबाद के लिए रवाना हुआ था।

बात को fast forward करता हूँ क्यूंकि यहाँ मै अपनी भावनात्मक व्यथा का वर्णन नहीं करना चाहता :) इलाहबाद में मै चार साल रहा। बहुत ही सुखद और यादगार सफ़र रहा। सुबह सवेरे जलेबी-दही और कचोरी का सेवन; फिर खुद रोटी-सब्जी या चावल-दाल बनाना (पूरा खाना बनाने का समय कभी रहा नहीं) और फिर college का रास्ता नापना। मंगलवार और शनिवार के दिन "लेटे हुए हनुमान जी" के दर्शन और भी बहुत कुछ..... the list is very long one :)

अपने पूरे प्रवास के दौरान एक बात तो मुझे समझ में आ ही गयी थी कि, पूरे इलाहाबाद कि अर्थव्यवस्था छात्रो के  भरोसे चलती है। और यह बात मै हवा में नहीं बोल रहा हूँ, ऐसा कई बार हुआ है कि मै होली या दीवाली के अवकाश में घर नहीं गया और इलाहबाद कि गलियों में चारो तरफ एक सन्नाटा सा दिखायी देता था।  एक और बात जो बहुत बाद में मुझे दिल्ली आने के बाद समझ में आयी - जो कि काफी दिलचस्प है। मुझे याद है कि इलाहाबाद में हम किसी भी घर में घुस जाते थे किराए का कमरा पता करने के लिए; कोई हिचकिचाहट नहीं होती थी कि ये lodge है या कोई महल। दिल्ली आने के बाद ये समझ में आया कि अपना प्यारा शहर इलाहबाद कितना सरल तरीके से क्रियान्वित होता था।

पढाई CMP Degree College में हुई जिसको हम सब लोग "चौतरफा मार पीट"  college भी बोलते थे। अब ऐसा नहीं है कि वहाँ पर केवल मार पीट ही होती थी, पर इस बात में अतिशयोक्ति भी नहीं है :). कॉलेज लाइफ बहुत ही अच्छी रही। ख़ास कर मुझे अपने physics के classes बहुत ही पसंद आते थे। Chemistry में बहुत दिलचस्पी नहीं थी पर Chemistry lab में मुझे एक बात बहुत अच्छी लगती थी कि practicals के दौरान ढेर सारे रंगों का एक नज़ारा देखने को मिलता था। जिन लोगों ने इस कॉलेज में पढ़ाई कि है उनको Chemistry lab का एक और महत्व पता है ;) इसकी पीछे वाली दीवाल के पार ही हमारे प्यारे छात्र बंधुओं का आग्नेयास्त्रों के सारे परिक्षण और प्रयोग होते थे।

इतना अच्छा समय गुजारने के बाद मैंने करीब ११ साल पहले ये शहर छोड़ा और अपनी भाग दौड़ में इतना डूब गया कि वापस कभी जाने का मौका नहीं मिला। मन बहुत करता था कि मै एक बार उस धरती को नमन कर के आऊँ जिसके योगदान ने ही मुझे इस मुक़ाम पर पहुचाया है। मेरा सफ़र पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे गाँव से शुरू होकर आज यहाँ तक पंहुचा है तो इसका काफी हद तक श्रेय इलाहाबाद को जाता है।

सौभाग्यवश इस बार, विश्व बैंक के एक मिशन के लिए, मुझे इलाहाबाद और वाराणसी जाने का अवसर मिला। मै इस बात को सुनते ही काफी उत्तेजित हो गया था। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मै कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करुँ। उत्तेजना के साथ दुःख इस बात का था कि मुझे केवल ३-४ घंटे का समय होगा, अपने इस प्यारे शहर को देखने के लिए। हमारी पूरी टीम ने T B Sapru जिला अस्पताल का निरिक्षण किया।  उसके बाद मै पूरी टीम को लेकर "देहाती रसगुल्ला" गया - जो लोग इलाहाबाद से परिचित हैं उन्हें पता होगा कि मै इस शहर कि एक ख़ास चीज का जिक्र कर रहा हूँ। उसके बाद संगम और हनुमान जी के मंदिर का दर्शन। फिर दारागंज कि गलियों का थोड़ा दर्शन और फिर हम निकल पड़े वाराणसी कि ओर :( दुःख हुआ पर ख़ुशी भी कि एक बार फिर उस धरती के दर्शन हुए जो की मेरे रग-रग में बसा हुआ है।

एक बात तो मुझे कहनी पड़ेगी कि मुझे अब भी वो सारी गलियां और सड़के याद थी और अपनी पूरी टीम को शहर दिखाने के बाद काफी इतरा रहा था। मुझे ख़ुशी इस बात कि भी थी कि ये शहर पहले से कहीं ज्यादा साफ़ सुथरा दिखा। बाह्यरूप तो अब भी पुराने जैसा ही था, पर आतंरिक संचालन में  एक व्यवस्था नजर आयी। टी बी सप्रू हॉस्पिटल भी काफी साफ़ सुथरा दिखा जो कि एक सरकारी अस्पताल के हिसाब से काफी अलग एवं सुखद अनुभव था।

अंत में केवल एक ही बात कहना चाहूंगा कि ये शहर एक अलग विचारधारा पर चलता है; मुझे इस शहर से प्यार है और हमेशा रहेगा। इस शहर में - विरोध भी हैं तो एकता भी है - भिन्नता भी है तो समानता भी है - और - घमंड भी है तो सहिष्णुता भी है।

प्रयाग नगरी में सबका स्वागत है :)

2 comments:

  1. Aapke blog main sabhi rachnayen beshak dilchasp hongi, lekin na jaane kyun nazar barbas essi Allahabad wali post par hi kyun pad gai. Shayad esiliye kyunki mere papa ji ka bachpan bhi allahabad main hi beeta hai. Ek baar essay competition ke liye National Academy of Science gai thi, in graduation aur tab pata chala sach main kitna sadgi wala shahar hai.

    ReplyDelete
    Replies
    1. aapka bahut-2 dhanyavad post pasand karne ke liye...ek bahut hi pyara shahar hai ye..kabhi samay mila to aur bhi likhunga...dher saari yaade judi hui hain yahan se..aise hi utsah badhate rahiye ...

      Delete