Monday, August 18, 2014

कृष्ण जन्माष्टमी

हर्ष, उल्लास, फैला चहुँ ओर,
देखो-देखो आया माखन चोर।

नटखट चाल, दधि, मुख पर सोभित,
श्याम रंग, सर पर पंख मोर।

प्रेमी, सखा, इष्ट, सारथि, रूप कई
जैसे चाहो पूजो तुम, पाप कटेंगे घोर।


6 comments:

  1. पाण्डेय जी आपने प्रेरणा का काम किया है आज. लीजिये प्रस्तुत हैं कुछ पंक्तियाँ :

    साँझ होए सो आये धेनु चरइया,
    जाकी मैया रूठे तो बजाये मुरलिया

    राधा की मटकी फोड़ी जाने,
    ते जाके गोपियाँ संग निरे ताने बाने

    जीवन का सार दियो अर्जुन को,
    गीता का पाठ सीखा दियो कलयुग को

    आज है कुंज गलियन में शोर,
    नन्द के आनंद भयो है नंदकिशोर

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    1. वाह-वाह-वाह ......कितनी बार कहूँ :)) आपने बहुत ही सुन्दर लिखा है। बस एक बात पूछनी थी - "नन्द के आनंद" है या "नन्द के आंगन" है? ये अगर इतनी ही और बढ़ जाए तो छप सकती है :)) अतिसुन्दर !!

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    2. Vaise bhajan main to anand hai. Lekin yahan aangan shabd jyaada sateek lag raja hair.

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  2. वाह-वाह अतिसुन्दर

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    1. धन्यवाद सर :) आगे बढ़ा पाऊंगा तो मन को और भी अच्छा लगेगा।

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  3. Pandey Ji, i have shared krishna poem on my blog.

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