Sunday, August 9, 2015

इलाहाबाद में अंग्रेजी नाश्ता

हमें अंग्रेजी बोलता देख
ड्राईवर सीधे अंग्रेजी नाश्ते की दुकान पर ले गया
और बोला
"साहब चीज-सैंडविच खाओ"

हमने कहा "अरे भाई-
दिखावे पे मत जाओ, अपनी अकल लगाओ।
भाषा छोड़ सब देशी है
अरे ये तो बता, कौन से एंगल से हम विदेशी हैं?"

वो सकपकाया और धीरे से बोला-
"साहब क्या कहें हम गरीब तो दर-ब-दर भटकते हैं।
पर आजकल अपने ही सबसे ज्यादे अँगरेज़ बने फिरते हैं।"

बात तो सच ही कही उसने अपने ही अंदाज़ में
कहीं खुद को ही तो नहीं भूल रहे दिखावे के राज में।

Saturday, August 1, 2015

एक नया प्रयास - शायद शेर हैं ये या तुकबंदी ;)

रात को सुबह होने तक मत देख।
कुछ सपने देख, सपनों के सपने मत देख।।


अच्छा काम करना है तो अभी कर ले।
नतीजे को देख, मुहूरत मत देख।।


हज़ारों सर झुकेंगे तेरे राह में।
जज़्बे को देख, लिबास मत देख।।


हिम्मत कर, आसमा कदम चूमेगा।
मेहनत-कश बन, आसरा मत देख।।


ये लड़ाई केवल उसूलों की है 'राहुल'।
सामना कर, अब पीछे मत देख।।

Friday, June 26, 2015

लेखनी रुकी क्यूँ है?

एक अरसे से कुछ लिखा ही नहीं।
ऐसा नहीं कि कुछ मिला ही नहीं!
कलम रुक सी जाती है हर बार,
तुम्हारी तरह, इसको भी तो गिला नहीं?

छंद-वंद, नज़्म-वज़्म, अशरार-वशरार,
दुःख-सुख, नोक-झोक, प्यार-व्यार-
सब पढ़े, देखे और महसूस किये मैंने।
कविता इन्ही से? पर 'भाव' मिला ही नहीं।

जब भी बुनना चाहा, शब्दों की लड़ियाँ,  
टूट गए अहसास के धागे, बिखर गयी कड़ियाँ।
सोचता और फिर जोड़ने की कोशिश करता-
इन अधपकी कविताओं का कद्रदान मिला ही नहीं।

Work in progress.............................................................!

Tuesday, January 20, 2015

मै मिथ्या हूँ, और यही सत्य है

एक अलग प्रयास, सही गलत पता नहीं। और जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, सही गलत से अधिक लिखने में स्वयं को आनंद आना चाहिए :) पढ़िये और अपने विचार से अवगत कराइये:

मै मिथ्या हूँ, और यही सत्य है।

मै जो अंदर हूँ, वो बाहर नहीं !!
जो कथन में है, वो कर्म में नहीं !!
मै नश्वर हूँ, मै मिथ्या हूँ।।

मै सांत्वना देता हूँ, पर स्वयं दुखी !! 
मै सहायता करता हूँ, पर स्वयं असहाय !!
मै निर्बल हूँ, मै मिथ्या हूँ।

मै स्वतंत्र हूँ, पर द्वन्द से घिरा हुआ !!
मै धनवान हूँ, पर महत्वाकांक्षा का शिकार !!
मै "निर्धन" हूँ, मै मिथ्या हूँ।।

"मै" अहम है, "मै" मिथ्या है !
"मै" के बिना मै ब्रह्म, और यही परम सत्य है।