Friday, June 26, 2015

लेखनी रुकी क्यूँ है?

एक अरसे से कुछ लिखा ही नहीं।
ऐसा नहीं कि कुछ मिला ही नहीं!
कलम रुक सी जाती है हर बार,
तुम्हारी तरह, इसको भी तो गिला नहीं?

छंद-वंद, नज़्म-वज़्म, अशरार-वशरार,
दुःख-सुख, नोक-झोक, प्यार-व्यार-
सब पढ़े, देखे और महसूस किये मैंने।
कविता इन्ही से? पर 'भाव' मिला ही नहीं।

जब भी बुनना चाहा, शब्दों की लड़ियाँ,  
टूट गए अहसास के धागे, बिखर गयी कड़ियाँ।
सोचता और फिर जोड़ने की कोशिश करता-
इन अधपकी कविताओं का कद्रदान मिला ही नहीं।

Work in progress.............................................................!