Saturday, August 1, 2015

एक नया प्रयास - शायद शेर हैं ये या तुकबंदी ;)

रात को सुबह होने तक मत देख।
कुछ सपने देख, सपनों के सपने मत देख।।


अच्छा काम करना है तो अभी कर ले।
नतीजे को देख, मुहूरत मत देख।।


हज़ारों सर झुकेंगे तेरे राह में।
जज़्बे को देख, लिबास मत देख।।


हिम्मत कर, आसमा कदम चूमेगा।
मेहनत-कश बन, आसरा मत देख।।


ये लड़ाई केवल उसूलों की है 'राहुल'।
सामना कर, अब पीछे मत देख।।

6 comments:

  1. उम्दा हर कलाम दिल से निकला है । लिखते रहिये ।

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    1. शुक्रिया जनाब ।

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  2. Shaandaar agaaz hai. Urdu poetry site Rekhta par aa paaye jaayenge bahut jald.

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    1. धन्यवाद...अभी इसमें देर है :)

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  3. अच्छी ग़ज़लें लिखते हो इसी पर रियाज़ ज्यादा हो और पढ़ने को मिलता रहे तो आत्मा तृप्त रहे। बहुत अच्छी है :) बधाई

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    1. शुक्रिया सर....प्रयास जारी रहेगा।

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